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वायुमंडल एवं उसका संगठन

 वायुमंडल एवं उसका संगठन-


  1. पृथ्वी के चारों ओर हवा के विशाल आवरण को वायुमंडल कहते हैं । 
  2. वायुमंडल का करीब 99%भाग केवल नाइट्रोजन 78.8% , ऑक्सीजन 20.95% गैसों से निर्मित है शेष 1% भाग (आर्गन , नीयान , हाइड्रोजन , क्रिप्टोन , जेनोन , हीलियम , ओजोन )है । 
  3. पृथ्वी के साथ वायुमंडल गुरुत्वाकर्षण के कारण टिका रहता है । 
  4. वायुमंडल का विस्तार लगभग 10000 किलोमीटर तक फैला हुआ है । 


नाइट्रोजन-


  1. यह वायुमंडल में पाया जाने वाली गैस 78.8 % है । 
  2. वायुमंडल में नाइट्रोजन की उपस्थिति के कारण ही वायुदाब पवनों की शक्ति तथा प्रकाश के परावर्तन का आभास होता है लेग्यूमिनस पौधे वायुमंडल नाइट्रोजनी पोषक तत्वों की पूर्ति करते हैं । 
  3. नाइट्रोजन से पेड़ पौधों में प्रोटीन का निर्माण होता है जो भोजन के मुख्य धटक हैं । 
आक्सीजन-
  1. आक्सीज़न जंतुओं तथा मानव के लिये प्राणदायिनी गैस होती है । 
  2. वायुमंडल में आक्सीजन की मात्रा 120 किलोमीटर की ऊंचाई पर नगण्य होती है । 
  3. पेड़ पौधों के द्वारा कार्बन डाई आक्साइड ग्रहण की जाती है तथा आक्सीजन छोड़ी जाती है । 

हाइड्रोजन-

  1. वायुमंडल में हाइड्रोजन सबसे हल्की गैस होती है 
  2. हाईड्रोजन अन्य गैसों के ऊपर लगभग 1100 क़िलोमीटर की ऊंचाई तक पाई जाती है । 

आर्गन-

  1. वायुमंडल में उपस्थित अक्रिय गैसों में आर्गन की मात्रा सर्वाधिक होती है । 
  2. आर्गन एक भारी गैस है । 
  3. वायुमंडल में अन्य अक्रिय गैस- नियान , हिलीयम , क्रिप्टोन , जेनोन , ओजोन है । 

जलवाष्प-

  1. वायुमंडल में इसकी मात्रा 1 से 4 % तक होती है । 
  2. सूर्य ताप से लगभग 1.4 करोड़ टन जल  वाष्प बनकर उड़ जाता है ।
  3. विषुवत रेखा पर जलवाष्प अधिक तथा ध्रुवों पर कम पाई जाती है । 
  4. जलवाष्प की मात्रा 90 किलोमीटर की ऊंचाई तक पाई जाती है ।

धूल कण-

  1. वायुमंडल के सबसे लिचले भाग में धूलकण पाये जाते है इसमें अनेक प्रकार की अशुद्धियाँ पाई जाती हैं । 
  2. धूलकणों के कारण ही सूर्योदय , सूर्यास्त , मेघ तथा इंद्रधनुष के विभिन्न रंग बिखरते हैं । 

वायुमंडल के प्रकार-

 वायुमंडल की ऊंचाई करीब 10000 किलोमीटर है , परन्तु धरातल से केवल 800 किलोमीटर  की ऊंचाई तक का ही वायुमंडल अधिक महत्वपूर्ण है । तापमान के आधार पर इसे 5 परतों में विभाजित किया गया है । 

क्षोभ मंडल -

  1. वायुमंडल के सबसे निचले भाग की ऊंचाई धरातल से लगभग 12 किलोमीटर होती है जिसे क्षोभ मंडल या परिवर्तन मंडल कहते हैं । 
  2. धरातल के ऊपर जाने पर प्रति 165 मीटर की ऊंचाई पर 1 डिग्री सेल्सियस तापमान घटता जाता है । 
  3. विषुवत रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर इसकी ऊंचाई घटती है । 
  4. मौसम सम्बंधी सभी घटनायें जैसे बादल , कुहरा , ओला , आँधी-तूफान आदि इसी में घटती हैं । 
  5. क्षोभ मंडल तथा समताप मंडल के बीच 1.5 किलोमीटर की मोटी परत को ट्रोपोपॉज कहते हैं । 
  6. विषुवत रेखा पर ट्रोपोपॉज की ऊंचाई अधिकतम 16 से 18 किलोमीटर तथा ध्रुवों पर न्यूनतम 8 से 10 किलोमीटर होती है । 
  7. क्षोभ मंडल की ऊपरी सीमा को क्षोभ सीमा कहते हैं जिसमें वायुमंडल का तापमान गिरना बंद हो जाता है । 

समताप मंडल- 

  1. क्षोभ मंडल के ऊपर करीब 50 किलोमीटर की ऊंचाई तक के क्षेत्र को समताप मंडल कहते हैं । 
  2. समताप मंडल में तापमान स्थिर रहता है । 
  3. इसी मंडल में ओजोन परत उपस्थित रहती है जिसके कारण इसे ओजोन मंडल भी कहते हैं । 
  4. ओजोन गैस की अधिकता के कारण पराबैंगनी विकिरण का अवशोषण अधिक होता है । 
  5. मौसमी हलचलों से मुक्त होने के कारण वायुयान चालकों के लिये यह उत्तम मंडल है । 
  6. इस मंडल में तापमान का परिवर्तन नहीं होता है अर्थात तापमान स्थिर रहता है । 

मध्य मंडल-

  1. 50 किलोमीटर से 80 किलोमीटर की ऊंचाई वाला वायुमंडलीय भाग मध्य मंडल कहलाता है । 
  2. 80 किलोमीटर की ऊंचाई पर तापमान  -80 डिग्री (-120डिग्री F) हो जाता है इस न्यूनतम तापमान की सीमा को मेसोपॉज कहते हैं । 
  3. मेसोपॉज के ऊपर वायुमंडलीय भाग (अनंत ऊंचाई तक ) ताप मंडल कहलाता है । इसमें ऊंचाई के साथ तीव्र गति से तापमान बढ़ता है । 

आयन मंडल- 

  1. वायुमंडल का यह भाग 80 से 600 किलोमीटर तक फैला हुआ है इस भाग में स्वतंत्र आयन की संख्या प्रचुर मात्रा में पाई जाती है । 
  2. विधुत आवेशित कणों की अधिकता होने के कारण इस क्षेत्र में विषुवतीय एवं चुम्बकीय घटनायें घटित होती हैं । 
  3. उल्काओं की चमक इसी भाग में ही होती है 
  4. आयन मंडल कई तहों में बंटा हुआ है इसके सबसे नीचे की तह डी- तह कहलाती है । 

बाह्य मंडल (चुम्बकीय मंडल )-

  1. यह मंडल 600 किलोमीटर से अधिक ऊंचाई पर फैला हुआ है । 
  2. इस परत में आक्सीजन के न्यूट्रल कण , आयनीकृत आक्सीजन तथा हाईड्रोजन के अणु भारी मात्रा में पाये जाते हैं । 
  3. गुरुत्वाकर्षण के क्षीण होने के कारण हाइड्रोजन तथा हिलीयम के सूक्ष्म कण शून्य में विसरित हो जाते हैं । 
  4. 10000 किलोमीटर से ऊपर केवल इलेक्ट्रान तथा प्रोटोन पाये जाते हैं इस मंडल को चुम्बकीय मंडल कहते हैं । 

ओजोन परत-

  1. ओजोन परत प्राकृतिक रूप से निर्मित ओजोन गैस की पट्टी है , पृथ्वी से 15-50 किलोमीटर ऊपर स्ट्रेफोस्फेयर (समताप मंडल ) में पाई जाती है । 
  2. ओजोन परत सूर्य से निकलने वाली पराबैंगनी किरणों को सोखकर पृथ्वी पर नहीं पहुंचने देती है । 
  3. पराबैंगनी किरणें मानव स्वास्थ्य तथा पर्यावरण को हानि पहुंचा सकती है । 
  4. ओजोन परत क्षति के लिये सबसे जिम्मेदार गैस क्लोरोफ्लोरो कार्बन CFC गैस है । 
  5. CFC का प्रयोग रेफ्रिजरेटर तथा कंडीशनिंग सिस्टम में कूलिंग एजेंट के रूप में होता है । 
  6. ओजोन परत को CFC से होने वाले नुकसान को रोकने के लिये अंतराष्ट्रीय स्तर पर 1987में मांट्रियल प्रोटोकॉल समझौता हुआ । 


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